यहां मिली इंसानों का खून चूसने वाली
महिला वैंपायर की कब्र, दोबारा
जिंदा न हो इसलिए किया गया यह काम!
पौलेंड में पुरातत्वविद को सदियों पुरानी
एक कब्र मिली है। इस कब्र को देखकर सभी हैरान रह गए। दरअसल, पुरातत्वविद यहां एक 17वीं सदी की कब्र खोद रहे थे। इसी दौरान
उन्हें यह कब्र मिली। यह एक महिला की कब्र थी और उसके दांत किसी वैंपायर की तरह
थे। साथ ही उसके गले के चारों तरफ दराती लगाई गई थी। बता दें कि दरांती से फसल
काटी हाती है, जिसे हसिया
भी कहा जाता है।
दोबारा जिंदा न हो इसलिए किया गया यह काम!
इस वजह से लगाई गई थी गले पर दरांती
रिपोर्ट के
अनुसार, पुरातत्वविदों
का कहना है कि महिला के गले के चारों ओर दरांती लगाने का मकसद ये था कि अगर मरने
के बाद भी ये महिला वापस जिंदा हो तो दरांती से इसका सिर कटकर कब्र में ही रह जाए।
इसकी जांच करने वाले पुरातत्वविदों की टीम के प्रमुख निकोलस कॉपरनिकस यूनिवर्सिटी
के प्रोफेसर डॉरिज पोलिंस्की ने बताया कि इस महिला के आगे के दांत वैंपायरों की
तरह नुकीले थे। साथ ही यह सिल्क की टोपी पहनती थी। टोपी के रेशे उसकी कब्र से मिले
हैं। वहीं उसके गले पर दरांती को इस तरह से सेट किया गया था कि अगर यह दोबारा उठे
तो इसका सिर कट जाए। ऐसे में यह वापस कब्र से बाहर नहीं आ पाएगी।
वैंपायरों का था खौफ
वहीं
स्मिथसोनियन मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, 11वीं शताब्दी में यूरोप के लोगों में
वैंपायरों का खौफ था। ऐसे में लोग उस समय मृतक रिश्तेदारों की कब्रों में वैंपायर
विरोधी परंपराओं का पालन करते थे, सामान रखते थे और पूजा आदि करते थे। बताया जाता है कि उस समय लोगों का
मानना था कि वैंपायर्स मरने के बाद भी वापस आकर खून पीने के लिए इंसानों को
मारेंग। इसी वजह से उनके गले के चारों तरफ दरांती लगा दी जाती थी।
ऐसे दफनाते थे शवों को
प्रोफेसर
डॉरिज पोलिंस्की का कहना है कि 17वीं शताब्दी तक पौलेंड में वैंपायर्स माने जाने वाले इंसानों को दफनाते समय
गले के चारों तरफ दरांती फंसा दी जाती थी। साथ ही उन्होंने बताया कि कई बार ये
दरांतियां उनके हाथ पैर में भी लगाई जाती थी। वैंपायर माने जाने इंसानों के शव को
उलटा करके दफनाया जाता था ताकि वो मुंह खोले तो उन्हें मिट्टी ही खाने को मिले। कई
बार उन्हें कब्र में जला दिया जाता था। या फिर पत्थरों से मारकर दबा दिया जाता था।






